एक पिता का सपना और बेटी की जिद
“पापा हमेशा कहते थे कि मेरी बिटिया नाम रौशन करेगी। उस समय तो मैं पढ़ाई में भी बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्हें मुझ पर पूरा विश्वास था। जब तक वह थे, उन्होंने मुझे कभी किसी परेशानी का एहसास नहीं होने दिया। उनके जाने के बाद मैंने ठान लिया कि पापा का सपना पूरा करना ही मेरा लक्ष्य होगा।”
ये शब्द हैं कोटा, राजस्थान की रहने वाली प्रेरणा सिंह के, जिन्होंने तमाम कठिनाइयों को पार कर NEET परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त की और अपने परिवार का नाम रोशन किया। प्रेरणा की कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और अपार मेहनत की मिसाल है।
मुश्किलों की शुरुआत: पिता का साया उठा, जिम्मेदारियों का पहाड़ टूटा
प्रेरणा जब सिर्फ दसवीं कक्षा में थीं, तभी उनके पिता का आकस्मिक निधन हो गया। उनके पिता ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे, लेकिन उनके जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई।
घर की ज़िम्मेदारियां अकेले उठाने वाली माँ ने मकान की किश्तें चुकाने और अन्य खर्चों के लिए छोटे-मोटे काम किए, लेकिन उनकी आय इतनी नहीं थी कि वे अपनी बेटी की मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोचिंग का खर्च उठा सकें। ऐसे हालातों में भी प्रेरणा ने हार नहीं मानी और घर के एक कोने में अपनी छोटी-सी स्टडी टेबल पर दिन-रात मेहनत करके NEET परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
भूख, तंगी और संघर्ष: फिर भी अडिग रहा हौसला
कई बार ऐसा हुआ जब प्रेरणा को भूखे पेट पढ़ना पड़ा, तो कभी केवल एक वक्त रोटी-चटनी खाकर गुज़ारा करना पड़ा। कोचिंग जॉइन करने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन उनके इरादे अटूट थे।
हर दिन जब वह अपने पिता के ऑटो को घर के बाहर खड़ा देखतीं, तो उन्हें अपनी मंज़िल याद आ जाती। यह वही ऑटो था, जिससे उनके पिता ने पूरे परिवार को संभाला था। यह उनकी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बन गया। उन्होंने ठान लिया कि चाहे जितनी भी कठिनाइयाँ आएं, वह डॉक्टर बनकर ही रहेंगी।
सफलता की ओर कदम: 720 में से 686 अंक और 1033वीं रैंक
अटूट मेहनत और जबरदस्त संघर्ष के बल पर प्रेरणा ने NEET परीक्षा में 720 में से 686 अंक हासिल किए और 1033वीं रैंक प्राप्त की। इस सफलता ने उनके परिवार और पूरे शहर में खुशी की लहर दौड़ा दी। उनकी यह उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर मेहनत और लगन सच्ची हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ते की दीवार नहीं बन सकती।
डॉक्टर बनने का सपना और आगे की योजनाएं
अब प्रेरणा अपने परिवार की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं। उनके इस सफर में आर्थिक चुनौतियाँ थीं, लेकिन उनका जज़्बा कभी डगमगाया नहीं। उनकी माँ ने भी अपनी सीमित आय में उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी और हर संभव सहयोग किया।
भविष्य में प्रेरणा डॉक्टर बनकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों पर शोध करना चाहती हैं। उनका सपना है कि गरीबों को उचित इलाज मिले और कोई भी व्यक्ति पैसों की कमी की वजह से चिकित्सा से वंचित न रहे।
‘प्रेरणा’ बनी हजारों छात्रों के लिए मिसाल
आज प्रेरणा सिर्फ अपने परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं, जो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखते हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हर मुश्किल को हराया जा सकता है।
अगर आपके पास भी ऐसा कोई सपना है जो आपको बड़ा बनना सिखा सकता है, तो प्रेरणा सिंह की कहानी से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें और अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी ताकत झोंक दें। क्योंकि जब इरादे मजबूत होते हैं, तो हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है।