Friday, April 4, 2025
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कैसे नमन गुप्ता ने सिगरेट बट्स से पर्यावरण को बचाने का बीड़ा उठाया?

भारत में सिगरेट बट्स का बढ़ता खतरा भारत में हर साल लगभग 10 हजार करोड़ यानी 100 बिलियन सिगरेट बट्स फेंके जाते हैं, जिनका कुल वजन 26,000 टन से भी अधिक होता है। देखने में यह छोटी-सी लगने वाली सिगरेट बट पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसमें मौजूद केमिकल्स और प्लास्टिक फाइबर मिट्टी और जलस्रोतों को दूषित कर सकते हैं।

हैरानी की बात यह है कि इस समस्या के समाधान के लिए बहुत कम प्रयास किए गए हैं। 2018 तक भारत में कोई भी ऐसी कंपनी नहीं थी जो सिगरेट बट्स के कचरे को रीसायकल करने का कार्य कर रही हो। लेकिन नोएडा के युवा उद्यमी नमन गुप्ता ने इस गंभीर समस्या को न केवल पहचाना, बल्कि इसका एक स्थायी समाधान भी निकाला।

कैसे मिली नमन गुप्ता को इस अनोखे विचार की प्रेरणा? नमन गुप्ता, जिन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है, ने पढ़ाई के दौरान ही सिगरेट बट्स से होने वाले प्रदूषण की समस्या पर काम करने का निर्णय लिया। जब उन्होंने इस पर शोध किया, तो पाया कि भारत में इस वेस्ट को लेकर जागरूकता की भारी कमी है।

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने इस समस्या पर गंभीरता से काम करना शुरू किया। करीब सात महीने की गहन रिसर्च और ट्रायल्स के बाद नमन ने एक ऐसा समाधान विकसित किया जिससे सिगरेट बट्स को पूरी तरह से रिसायकल किया जा सकता था। साथ ही उन्होंने जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए।

Code Effort: भारत की पहली सिगरेट वेस्ट रिसाइक्लिंग कंपनी नमन गुप्ता ने 2018 में ‘Code Effort’ नामक कंपनी की स्थापना की, जो भारत की पहली सिगरेट बट रिसाइक्लिंग कंपनी बनी। उन्होंने इस इनोवेटिव पहल के तहत सिगरेट बट्स को रिसाइक्लिंग योग्य उत्पादों में बदलने की तकनीक विकसित की।

इस प्रक्रिया में सिगरेट बट्स से निकोटीन और अन्य विषैले तत्वों को निकालकर उनसे उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं।

कैसे काम करती है यह प्रक्रिया?

  1. संग्रहण (Collection):
    • कूड़ा बीनने वालों और विभिन्न संस्थानों के सहयोग से हर रोज़ 6-7 मिलियन सिगरेट बट्स इकट्ठा किए जाते हैं।
  2. प्रसंस्करण (Processing):
    • बट्स को साफ किया जाता है और उनसे निकोटीन को हटाया जाता है।
    • फिल्टर में मौजूद सेल्यूलोज एसीटेट को अलग किया जाता है।
  3. पुनर्चक्रण (Recycling):
    • निकाले गए मटीरियल का उपयोग विभिन्न उत्पादों जैसे कि सॉफ्ट टॉयज, टेक्सटाइल, पेपर और होम डेकोर आइटम्स में किया जाता है।

सिगरेट बट्स से बने उत्पाद: क्या आप इन्हें खरीदना चाहेंगे? Code Effort ने न केवल सिगरेट वेस्ट को रिसाइक्लिंग करने में सफलता प्राप्त की, बल्कि इससे बने उत्पादों को बाजार में उतारा। कंपनी इन रिसाइकल्ड मटीरियल से सॉफ्ट टॉयज, कुशन, पेपर प्रोडक्ट्स और अन्य घरेलू उपयोग की चीजें तैयार करती है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या आप एक ऐसे टेडी बियर को खरीदना चाहेंगे जो सिगरेट बट्स से बना हो? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन Code Effort ने इसे संभव कर दिखाया है।

नमन गुप्ता की सफलता और भविष्य की योजनाएं आज Code Effort रोजाना लगभग 5 मिलियन सिगरेट बट्स को रिसाइक्लिंग करता है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। नमन का उद्देश्य इस प्रोजेक्ट को और विस्तार देना है ताकि भारत को इस गंभीर पर्यावरणीय खतरे से बचाया जा सके।

उन्होंने कई कूड़ा बीनने वालों को रोजगार देकर उन्हें एक स्थायी आय का जरिया भी दिया है। यह मॉडल पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्थान दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

क्या आप भी इस पहल का हिस्सा बनना चाहेंगे? यदि आप पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान देना चाहते हैं, तो आप Code Effort के साथ जुड़ सकते हैं।

  • सिगरेट बट्स को इधर-उधर फेंकने की बजाय इन्हें सही तरीके से डिस्पोज करें।
  • रिसाइकल किए गए उत्पादों को खरीदकर इस पहल को और मजबूत बनाएं।

इस पहल का समर्थन कर आप न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे, बल्कि एक स्वस्थ और स्वच्छ भारत बनाने की दिशा में भी योगदान देंगे।

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